लिवर सिरोसिस के लक्षण और इलाज: सिरोसिस क्या है, क्यों होता है और मरीज़ कितने साल जी सकता है

लिवर सिरोसिस के लक्षण और इलाज: सिरोसिस क्या है, क्यों होता है और मरीज़ कितने साल जी सकता है

Liver cirrhosis is scarring of the liver — not cancer, though it does raise the risk of liver cancer. In this Hindi guide, Dr Chetan Kalal, DM Hepatologist at Gleneagles Hospital, Mumbai, explains what cirrhosis is, why it happens in India (alcohol, fatty liver with diabetes, hepatitis B and C), how to recognise its symptoms and emergencies, what “compensated” and “decompensated” mean for life expectancy, and how it is treated. For the English version, read our liver cirrhosis page.

लिवर सिरोसिस कैंसर नहीं है — यह लिवर पर पड़े पुराने घावों के निशान (scarring) हैं, जो शराब, फैटी लिवर या हेपेटाइटिस B/C से बनते हैं। शुरुआती (compensated) अवस्था में पकड़ में आ जाए तो 5 साल में मृत्यु का खतरा सिर्फ़ 1.5% है; पेट में पानी या खून की उल्टी के बाद यही खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कारण का इलाज और नियमित जाँच ही असली दवा है।
— डॉ. चेतन कलाल, DM हेपेटोलॉजी, ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल, मुंबई

मुख्य बातें

  • सिरोसिस = लिवर में जख्म के निशान, कैंसर नहीं। लेकिन सिरोसिस वाले लिवर में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है — इसलिए हर 6 महीने में अल्ट्रासाउंड ज़रूरी है।
  • भारत के 11 अस्पतालों के अध्ययन में सिरोसिस का सबसे बड़ा कारण शराब (34.3%) था; हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C और फैटी लिवर (डायबिटीज़, मोटापा) बाकी बड़े कारण हैं।
  • शुरुआती (compensated) सिरोसिस में अक्सर कोई लक्षण नहीं होता। पीलिया, पेट में पानी, उलझन या खून की उल्टी आते ही बीमारी decompensated कहलाती है।
  • 494 मरीज़ों के 25 साल के अध्ययन में 5 साल के भीतर मृत्यु: शुरुआती अवस्था 1.5%, पहली बड़ी जटिलता के बाद 30%, दूसरी जटिलता के बाद 88%।
  • प्रोटीन कम मत कीजिए — EASL की पोषण गाइडलाइन रोज़ 1.2–1.5 ग्राम प्रति किलो प्रोटीन और सोने से पहले हल्का नाश्ता बताती है।
  • कारण हटाइए (शराब बंद, हेपेटाइटिस का इलाज, वज़न घटाना); ज़रूरत पड़े तो लिवर ट्रांसप्लांट सिरोसिस का पक्का इलाज है।

“डॉक्टर साहब, सिरोसिस मतलब कैंसर हो गया क्या?” — यह सवाल मुझसे OPD में लगभग रोज़ पूछा जाता है। जवाब है: नहीं। सिरोसिस कैंसर नहीं है। लेकिन यह हल्की बीमारी भी नहीं है, और इसे ठीक से समझे बिना परिवार या तो ज़रूरत से ज़्यादा डर जाते हैं, या फिर बिल्कुल लापरवाह हो जाते हैं। दोनों ही गलत हैं।

इस लेख में मैं वही बातें सरल हिंदी में लिख रहा हूँ जो अपने मरीज़ों के परिवार को समझाता हूँ: सिरोसिस है क्या, भारत में क्यों होता है, लक्षण किस क्रम में आते हैं, कौन-से संकेत इमरजेंसी हैं, Child-Pugh और MELD का मतलब, मरीज़ कितने साल जी सकता है, और इलाज में असल में क्या होता है। हर आँकड़ा प्रकाशित शोध से है, संदर्भ नीचे हैं। घर में किसी को सिरोसिस बताया गया है तो पूरा पढ़िए — और फिर अपने डॉक्टर से मिलकर सवाल पूछिए। यह लेख डॉक्टर की जगह नहीं लेता; हाँ, डॉक्टर से बात करना आसान बना देता है।

सिरोसिस क्या है — और क्या यह कैंसर है?

लिवर शरीर का सबसे सहनशील अंग है। चोट लगती है, वह खुद को ठीक कर लेता है। लेकिन जब चोट सालों तक रोज़ लगती रहे — शराब से, वायरस से, चर्बी से — तो मरम्मत की जगह निशान (फाइब्रोसिस) बनने लगते हैं। धीरे-धीरे पूरा लिवर सख्त, गाँठदार और सिकुड़ा हुआ हो जाता है। इसी अवस्था को सिरोसिस (cirrhosis) कहते हैं। The Lancet में 2021 में छपे समीक्षा लेख में इसे ठीक इसी तरह बताया गया है: लंबे समय की सूजन के बाद स्वस्थ लिवर ऊतक की जगह रेशेदार निशान और गाँठें ले लेती हैं, और उसी से लिवर की नसों में दबाव बढ़ता है जिसे पोर्टल हाइपरटेंशन कहते हैं।

तो कैंसर कहाँ आया? सिरोसिस कैंसर नहीं है, पर सिरोसिस वाले लिवर में कैंसर (hepatocellular carcinoma, HCC) बनने का खतरा सामान्य लिवर से कहीं ज़्यादा होता है। यही वजह है कि सिरोसिस के हर मरीज़ का हर 6 महीने में अल्ट्रासाउंड होना चाहिए। इस पर आगे विस्तार से बात करेंगे।

दो बातें और। सिरोसिस छूत की बीमारी नहीं है — कारण हेपेटाइटिस B या C हो तो वायरस फैल सकता है, सिरोसिस नहीं। और सिरोसिस का मतलब “लिवर खत्म” नहीं है: बन चुके निशान पूरी तरह नहीं मिटते, पर कारण हट जाए तो बचा हुआ लिवर सालों काम चलाता है और शुरुआती फाइब्रोसिस कुछ हद तक पीछे भी हटता है। असली सवाल है कि कितना लिवर बचा है — और उसका जवाब जाँच देती है, अंदाज़ा नहीं।

भारत में सिरोसिस क्यों होता है?

भारत के 11 अस्पतालों में 13,014 मरीज़ों पर हुए एक बहुकेंद्रीय अध्ययन (PLoS One, 2017) में सिरोसिस का सबसे आम कारण शराब निकला — 34.3% मरीज़ों में। हेपेटाइटिस B पुरानी लिवर बीमारी का सबसे बड़ा कारण (33.3%) था, और लिवर कैंसर के 46.8% मामलों के पीछे भी यही वायरस था। कारण इलाके के हिसाब से बदलते हैं: उत्तर भारत में हेपेटाइटिस C आगे है, पूर्व और दक्षिण में हेपेटाइटिस B, पूर्वोत्तर में शराब, और पश्चिम भारत — यानी मुंबई जैसे शहरों — में फैटी लिवर।

मेरे क्लिनिक की तस्वीर इससे मिलती-जुलती है, बस फैटी लिवर का हिस्सा हर साल बढ़ रहा है। डायबिटीज़, मोटापा और बैठे-बैठे की ज़िंदगी से लिवर में चर्बी जमती है, कुछ लोगों में सूजन होती है, और वहीं से निशान शुरू होते हैं। Global Burden of Disease 2017 के अनुसार उस साल दुनिया में सिरोसिस से 13.2 लाख से ज़्यादा मौतें हुईं, और 1990–2017 के बीच फैटी लिवर (NASH) से होने वाला सिरोसिस बाकी हर कारण से तेज़ बढ़ा। फैटी लिवर को “कुछ नहीं होता” कहकर टालना पुरानी सोच है। कम आम कारण — ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस, पित्त नलियों की बीमारियाँ, लिवर में तांबा या लोहा जमना, और लंबे समय की कुछ दवाएँ या जड़ी-बूटियाँ — भी ढूँढने पड़ते हैं, क्योंकि इलाज कारण पर टिका है।

और एक चौंकाने वाली बात उसी अध्ययन से: हर तीन में से एक मरीज़ (33.9%) डॉक्टर के पास तब पहुँचा जब सिरोसिस decompensated हो चुका था। देर इसलिए, क्योंकि शुरुआती सिरोसिस चुपचाप रहता है।

लिवर सिरोसिस के लक्षण: compensated और decompensated का फ़र्क

सिरोसिस दो अवस्थाओं से गुज़रता है, और दोनों में ज़मीन-आसमान का अंतर है।

Compensated सिरोसिस — निशान बन चुके हैं, पर बचा हुआ लिवर काम सँभाल रहा है। अक्सर कोई लक्षण नहीं; जो हैं, वे इतने हल्के कि लोग उम्र या थकान समझ लेते हैं: बिना वजह थकान, भूख कम, वज़न घटना, हथेलियाँ लाल, छाती-कंधों पर मकड़ी जैसी लाल नसें, पैरों में हल्की सूजन, या खून की जाँच में प्लेटलेट्स कम। बहुतों को सिरोसिस किसी और वजह से हुए अल्ट्रासाउंड या फाइब्रोस्कैन (FibroScan) में अचानक पता चलता है — और वही दो-तीन साल, जब इलाज सबसे ज़्यादा असर करता, चुपचाप निकल चुके होते हैं।

Decompensated सिरोसिस — लिवर अब काम नहीं सँभाल पा रहा। चार बड़े संकेत: पीलिया, पेट में पानी (ascites), दिमाग़ पर असर (hepatic encephalopathy), और खाने की नली की फूली नसों से खून बहना (variceal bleeding)। इनमें से कोई एक आते ही पूरा समीकरण बदल जाता है — पूर्वानुमान, इलाज की रफ़्तार, और ट्रांसप्लांट पर सोचने का समय।

एक लाइन याद रखिए: लक्षण न होना बीमारी न होने का सबूत नहीं। डायबिटीज़, मोटापा, कभी हेपेटाइटिस B या C, या नियमित शराब — इनमें से कुछ भी हो तो बिना लक्षण के भी एक बार लिवर की जाँच कराएँ (लिवर खराब होने के शुरुआती संकेत)।

चार बड़ी जटिलताएँ और इमरजेंसी के संकेत

पीलिया — आँखें-त्वचा पीली, पेशाब गहरा। सिरोसिस में यह धीरे बढ़ता है और बताता है कि लिवर का काम घट रहा है। अचानक गहरा पीलिया, साथ में बुखार या उलझन — तुरंत अस्पताल।

पेट में पानी (ascites) — पेट फूलना, वज़न अचानक बढ़ना, पैरों में सूजन, साँस फूलना। यह सबसे आम पहली जटिलता है; इलाज है नमक की सख्त रोक, पानी निकालने वाली दवाएँ और ज़रूरत पड़ने पर सुई से पानी निकालना (जलोदर का इलाज)। खतरे का संकेत: पानी के साथ बुखार या पेट दर्द — पानी में संक्रमण (SBP) जानलेवा हो सकता है।

दिमाग़ पर असर (hepatic encephalopathy) — सबसे ज़्यादा गलत समझी जाने वाली जटिलता। मरीज़ दिन में सोता है, रात को जागता है; बात करते-करते भटकता है; हाथ फैलाने पर काँपते हैं; बाद में गहरी नींद या बेहोशी। परिवार इसे “दिमाग़ी कमज़ोरी” या नज़र समझकर समय गँवा देते हैं, जबकि यह लिवर द्वारा साफ़ न हुए ज़हरीले पदार्थों (जैसे अमोनिया) का असर है और इलाज से पलटता है। ट्रिगर अक्सर कब्ज़, संक्रमण, नींद की गोली, पानी की कमी या पेट में खून बहना होता है।

खून की उल्टी या काला मल (variceal bleeding) — सिरोसिस की सबसे बड़ी इमरजेंसी। लिवर में दबाव बढ़ने से खाने की नली की नसें फूलती हैं और फटने पर बहुत खून बहता है। लाल या कॉफ़ी जैसी उल्टी, या तारकोल जैसा काला मल — घर पर इंतज़ार बिल्कुल नहीं, सीधे एंडोस्कोपी वाले अस्पताल (वेरिसियल ब्लीडिंग पर अलग लेख)।

जटिलतापहचानक्या करें
पीलियाआँखें-त्वचा पीली, पेशाब गहरा; अचानक बढ़े या साथ में बुखार/उलझन होहेपेटोलॉजिस्ट से जल्दी मिलें; अचानक गहरा पीलिया + बुखार/उलझन = तुरंत अस्पताल
पेट में पानी (ascites)पेट फूलना, वज़न तेज़ी से बढ़ना, पैरों में सूजन, साँस फूलनानमक कम, डॉक्टर की दी दवाएँ नियमित; बुखार या पेट दर्द हो तो उसी दिन अस्पताल (संक्रमण का खतरा)
दिमाग़ पर असर (encephalopathy)दिन-रात उलटी नींद, उलझन, भूलना, हाथ काँपना, ज़्यादा सोनाकब्ज़ और नींद की गोलियों से बचें; उलझन दिखते ही अस्पताल — यह इलाज से पलटता है
खून की उल्टी / काला मल (varices)लाल या कॉफ़ी जैसी उल्टी, तारकोल जैसा काला मल, चक्कर, बेहोशीइमरजेंसी — बिना देर किए एंडोस्कोपी वाले अस्पताल पहुँचें
लिवर कैंसर (HCC)शुरुआत में कोई लक्षण नहीं; बाद में वज़न घटना, दर्द, पीलिया बढ़नाहर 6 महीने में अल्ट्रासाउंड — लक्षण का इंतज़ार न करें

सिरोसिस का मरीज़ कितने साल जी सकता है? Child-Pugh और MELD का मतलब

यह सवाल हर परिवार पूछता है, और इसका ईमानदार जवाब यह है: यह इस पर निर्भर करता है कि बीमारी किस अवस्था में है और कारण हटाया गया या नहीं। सबसे अच्छे आँकड़े इटली के एक अध्ययन से हैं, जिसमें 494 मरीज़ों को औसतन 12 साल तक देखा गया (Aliment Pharmacol Ther, 2014)। उन्होंने सिरोसिस को पाँच अवस्थाओं में बाँटा: (1) compensated, नसें फूली नहीं; (2) compensated, नसें फूली हुई; (3) सिर्फ़ खून बहने की घटना; (4) पहली बार पेट में पानी, पीलिया या उलझन; (5) दूसरी कोई भी जटिलता। 5 साल के भीतर मृत्यु क्रमशः 1.5%, 10%, 20%, 30% और 88% थी।

इन संख्याओं को सही नज़र से देखिए। पहली अवस्था में 5 साल में मृत्यु सिर्फ़ 1.5% — यानी शुरुआती सिरोसिस का मरीज़ कारण हटाकर और जाँच कराते हुए सामान्य ज़िंदगी के बहुत करीब जी सकता है। दो जटिलताओं के बाद आँकड़े कठोर हैं — और यही वह मोड़ है जहाँ मैं परिवार से लिवर ट्रांसप्लांट की बात देर किए बिना शुरू करता हूँ। ध्यान रहे, ये आँकड़े उस दौर के हैं जब हेपेटाइटिस C की आज की दवाएँ नहीं थीं और अधिकतर मरीज़ हेपेटाइटिस C वाले थे; कारण का इलाज हो जाए तो आज की तस्वीर बेहतर है। आपका पूर्वानुमान आपकी रिपोर्ट तय करती है, औसत नहीं।

डॉक्टर इसी “कितना बिगड़ा है” को दो स्कोर से मापते हैं। Child-Pugh पाँच चीज़ें देखता है — बिलीरुबिन, एल्ब्यूमिन, खून जमने की जाँच (INR), पेट में पानी, दिमाग़ पर असर — और मरीज़ को A (सबसे अच्छा), B या C (सबसे गंभीर) में रखता है। MELD सिर्फ़ खून की जाँचों से बनता है; जितना ज़्यादा स्कोर, उतनी गंभीर बीमारी, और उसी से ट्रांसप्लांट की प्राथमिकता तय होती है। विस्तार MELD और Child-Pugh स्कोर वाले लेख में; अभी इतना काफ़ी है कि Child-Pugh A और कम MELD का मतलब समय है, Child-Pugh C और बढ़ता MELD का मतलब समय कम है।

सिरोसिस का इलाज: कारण, खान-पान, निगरानी और ट्रांसप्लांट

1. कारण का इलाज सबसे पहले। शराब से हुआ सिरोसिस हो तो शराब “कम” नहीं, पूरी तरह बंद — यह अकेला कदम बाकी सब इलाज से ज़्यादा असर करता है, और छोड़ने में परिवार या नशामुक्ति की मदद लेने में कोई शर्म नहीं (शराब से लिवर की बीमारी)। हेपेटाइटिस B में लंबे समय की एंटीवायरल गोलियाँ वायरस दबाकर लिवर को और बिगड़ने से रोकती हैं; हेपेटाइटिस C आज कुछ महीनों की गोलियों से ठीक होने वाली बीमारी है। फैटी लिवर में वज़न घटाना, डायबिटीज़ पर पक्का नियंत्रण और मीठे पेय बंद — यही इलाज है। और कोई भी दवा — दर्द की गोली, जड़ी-बूटी, “लिवर टॉनिक” — डॉक्टर से पूछे बिना नहीं।

2. खान-पान: भूखे रहना नुकसान करता है, प्रोटीन घटाना भी। यहाँ सबसे बड़ी गलतफ़हमी है — लिवर कमज़ोर है तो दाल-अंडा-दूध बंद करो। सच उल्टा है। सिरोसिस में शरीर अपनी मांसपेशियाँ तोड़कर काम चलाता है, और मांसपेशी घटना (sarcopenia) अपने आप में जान का खतरा बढ़ाता है। यूरोप की लिवर सोसायटी (EASL) की 2019 की पोषण गाइडलाइन साफ़ कहती है: रोज़ कम से कम 35 किलोकैलोरी और 1.2–1.5 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वज़न; थोड़ा-थोड़ा कई बार खाएँ; सुबह के नाश्ते और सोने से पहले के हल्के नाश्ते में भी कुछ प्रोटीन हो ताकि रात का लंबा उपवास टूटे; और encephalopathy में भी प्रोटीन न रोकें। ILBS, नई दिल्ली में हमारे अपने RCT में शराब से सिरोसिस वाले 104 कुपोषित पुरुषों को 3 महीने ज़्यादा कैलोरी-प्रोटीन दिया गया: पोषण स्तर सुधरा और पेट का पानी बेहतर सूखा, हालाँकि 12 महीने की जीवित रहने की दर दोनों समूहों में एक जैसी रही। भारतीय थाली के हिसाब से पूरा लेख: सिरोसिस में खान-पान।

3. निगरानी: दो जाँचें जो जान बचाती हैं। पहली, हर 6 महीने में लिवर का अल्ट्रासाउंड (अक्सर साथ में AFP खून की जाँच) — अमेरिकी लिवर सोसायटी (AASLD) की 2023 की गाइडलाइन के अनुसार सिरोसिस में कैंसर की निगरानी लगभग हर 6 महीने पर होनी चाहिए, क्योंकि छोटा कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है, बड़ा नहीं (लिवर कैंसर की निगरानी और इलाज)। दूसरी, एंडोस्कोपी — खाने की नली की नसें फूली हों तो खून बहने से पहले ही दवा या बैंडिंग से रोका जाता है। साथ में हेपेटाइटिस A और B के टीके, और नियमित खून की जाँचें ताकि Child-Pugh/MELD पर नज़र रहे।

4. लिवर ट्रांसप्लांट — जब बाकी सब कम पड़े। पेट का पानी दवाओं से काबू में न आए, बार-बार उलझन या खून बहे, MELD बढ़ता जाए, या सिरोसिस में छोटा कैंसर मिले — तो ट्रांसप्लांट ही इलाज है, और उसके बाद मरीज़ सामान्य ज़िंदगी में लौटता है। भारत में अधिकांश ट्रांसप्लांट परिवार के जीवित दाता से होते हैं। हमारी टीम 1000 से ज़्यादा लिवर ट्रांसप्लांट कर चुकी है, जिनमें लगभग 300 जटिल (complex) मामले थे, और जीवित रहने की दर 92% है। सही समय पर रेफ़र होना इस सफलता की पहली शर्त है — ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ से राय लेने के लिए आख़िरी अवस्था का इंतज़ार न करें।

सिरोसिस के साथ सालों अच्छी ज़िंदगी जीना संभव है। शर्त तीन हैं: कारण हटाइए, ठीक से खाइए, और जाँच कभी मत छोड़िए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या लिवर सिरोसिस कैंसर है?

नहीं। सिरोसिस लिवर में बने पुराने निशान (scarring) हैं, कैंसर नहीं। लेकिन सिरोसिस वाले लिवर में कैंसर बनने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हर 6 महीने में अल्ट्रासाउंड से निगरानी ज़रूरी है ताकि कैंसर छोटा रहते पकड़ा जाए।

लिवर सिरोसिस का मरीज़ कितने साल जी सकता है?

अवस्था पर निर्भर है। 494 मरीज़ों के 25 साल के अध्ययन में शुरुआती (compensated) सिरोसिस में 5 साल के भीतर मृत्यु सिर्फ़ 1.5% थी, पहली बड़ी जटिलता (पेट में पानी, पीलिया या उलझन) के बाद 30%, और दूसरी जटिलता के बाद 88%। कारण का इलाज और समय पर ट्रांसप्लांट इन आँकड़ों को बदल देते हैं।

क्या सिरोसिस ठीक हो सकता है?

बन चुके सख्त निशान पूरी तरह नहीं मिटते, लेकिन कारण हटाने पर (शराब बंद, हेपेटाइटिस का इलाज, वज़न घटाना) बीमारी रुक जाती है और शुरुआती फाइब्रोसिस कुछ हद तक पीछे हटता है। आगे बढ़ चुके सिरोसिस का पक्का इलाज लिवर ट्रांसप्लांट है।

सिरोसिस में क्या खाना चाहिए? क्या प्रोटीन बंद कर देना चाहिए?

प्रोटीन बंद नहीं करना चाहिए। EASL की पोषण गाइडलाइन रोज़ 1.2–1.5 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वज़न और कम से कम 35 किलोकैलोरी प्रति किलो बताती है, दिन में थोड़ा-थोड़ा कई बार, और सोने से पहले हल्का नाश्ता। नमक कम रखें, शराब बिल्कुल नहीं।

सिरोसिस में कौन-से लक्षण इमरजेंसी हैं?

खून की उल्टी या तारकोल जैसा काला मल, अचानक उलझन या बहुत ज़्यादा नींद, पेट में पानी के साथ बुखार या पेट दर्द, और अचानक गहरा पीलिया — इनमें से कुछ भी हो तो घर पर इंतज़ार न करें, सीधे अस्पताल जाएँ।

मुंबई के ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल में डॉ. चेतन कलाल से परामर्श के लिए +91 83294 76669 पर कॉल करें या इस वेबसाइट पर अपॉइंटमेंट फ़ॉर्म भरें। दूसरे शहरों और विदेश में रहने वाले मरीज़ टेली-कंसल्टेशन का अनुरोध कर सकते हैं।

लेखक: डॉ. चेतन कलाल — DM हेपेटोलॉजिस्ट, ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल, मुंबई। मुंबई में लिवर विशेषज्ञ। ORCID: https://orcid.org/0000-0002-5284-7890

अंतिम समीक्षा: 9 अक्टूबर 2026

संदर्भ (References)

  1. Ginès P, Krag A, Abraldes JG, Solà E, Fabrellas N, Kamath PS. Liver cirrhosis. Lancet. 2021;398(10308):1359–1376. PMID 34543610. doi:10.1016/S0140-6736(21)01374-X
  2. Mukherjee PS, Vishnubhatla S, Amarapurkar DN, et al. Etiology and mode of presentation of chronic liver diseases in India: a multi centric study. PLoS One. 2017;12(10):e0187033. PMID 29073197. doi:10.1371/journal.pone.0187033
  3. GBD 2017 Cirrhosis Collaborators. The global, regional, and national burden of cirrhosis by cause in 195 countries and territories, 1990–2017: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2017. Lancet Gastroenterol Hepatol. 2020;5(3):245–266. PMID 31981519. doi:10.1016/S2468-1253(19)30349-8
  4. D’Amico G, Pasta L, Morabito A, et al. Competing risks and prognostic stages of cirrhosis: a 25-year inception cohort study of 494 patients. Aliment Pharmacol Ther. 2014;39(10):1180–1193. PMID 24654740. doi:10.1111/apt.12721
  5. European Association for the Study of the Liver. EASL Clinical Practice Guidelines on nutrition in chronic liver disease. J Hepatol. 2019;70(1):172–193. PMID 30144956. doi:10.1016/j.jhep.2018.06.024
  6. Kalal C, Benjamin J, Shasthry V, et al. Effect of long-term aggressive nutrition therapy on survival in patients with alcohol-related cirrhosis: a randomized controlled trial. Indian J Gastroenterol. 2022;41(1):52–62. PMID 35235198. doi:10.1007/s12664-021-01187-3
  7. Singal AG, Llovet JM, Yarchoan M, et al. AASLD Practice Guidance on prevention, diagnosis, and treatment of hepatocellular carcinoma. Hepatology. 2023;78(6):1922–1965. PMID 37199193. doi:10.1097/HEP.0000000000000466

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2026 DR. CHETAN KALAL | DESIGNED BY EEG TECHNOGEEKS

Scroll to Top