हेपेटाइटिस बी और सी में अंतर: कैसे फैलते हैं, जाँच क्या है और इलाज कितना संभव है
Hepatitis B and hepatitis C are two different viruses that both attack the liver, but they spread differently, are diagnosed with different tests and have very different treatment outcomes. Hepatitis C is now cured in about 99% of people with 8–12 weeks of tablets; hepatitis B is controlled with long-term medication and has a safe, effective vaccine. This Hindi guide by Mumbai hepatologist Dr Chetan Kalal is for anyone just told “you have hepatitis” after a routine or pre-operative blood test. The English discussion of hepatitis C is on the hepatitis C page.
हेपेटाइटिस बी और सी दोनों लिवर के वायरस हैं, पर इनका रास्ता अलग है। हेपेटाइटिस सी अब 8 से 12 हफ़्ते की गोलियों से ठीक हो जाता है — एक बड़े ट्रायल में 99% मरीज़ वायरस-मुक्त हुए। हेपेटाइटिस बी पूरी तरह ख़त्म कम ही होता है, लेकिन रोज़ एक गोली से उसे काबू में रखकर सिरोसिस और लिवर कैंसर से बचा जा सकता है। बी का टीका है, सी का नहीं।
— डॉ. चेतन कलाल, DM हेपेटोलॉजी, ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल, मुंबई
मुख्य बातें
- दोनों वायरस ख़ून से फैलते हैं; हेपेटाइटिस बी यौन संबंध और माँ से बच्चे में भी। खाना, बर्तन, गले मिलना या साथ काम करना — इनसे कोई नहीं फैलता।
- HBsAg पॉज़िटिव = शरीर में हेपेटाइटिस बी का वायरस है। Anti-HCV पॉज़िटिव = वायरस से कभी सामना हुआ; सक्रिय संक्रमण HCV RNA टेस्ट से तय होता है।
- हेपेटाइटिस सी 8–12 हफ़्ते की गोलियों से ठीक हो जाता है; 12 हफ़्ते के एक ट्रायल में 99% मरीज़ ठीक हुए।
- हेपेटाइटिस बी में रोज़ एक गोली वायरस को दबाती है, पर HBsAg साल में क़रीब 1% लोगों में ही जाता है — इलाज लंबा चलता है।
- हेपेटाइटिस बी का टीका सुरक्षित और असरदार है; परिवार की जाँच और टीकाकरण ज़रूरी। हेपेटाइटिस सी का टीका नहीं है।
- दोनों बिना लक्षण के सिरोसिस और लिवर कैंसर तक पहुँच सकते हैं। रिपोर्ट पॉज़िटिव आए तो घबराएँ नहीं, पर लिवर विशेषज्ञ से ज़रूर मिलें।
एक काल्पनिक लेकिन आम उदाहरण लीजिए। 38 साल के एक व्यक्ति का घुटने के ऑपरेशन से पहले रूटीन ख़ून टेस्ट हुआ। रिपोर्ट में एक लाइन आई — HBsAg: Positive। ऑपरेशन टल गया, घर में हड़कंप। यह कैसे हुआ? क्या बच्चों को भी हो जाएगा? क्या अब लिवर ख़राब हो जाएगा?
मेरी ओपीडी में हर हफ़्ते ऐसे कई परिवार आते हैं। ज़्यादातर को यह भी नहीं पता होता कि हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी दो बिल्कुल अलग वायरस हैं — अलग तरह से फैलते हैं, अलग जाँच से पकड़े जाते हैं, और सबसे अहम, इनका इलाज अलग है। एक पूरी तरह ठीक हो जाता है। दूसरे को काबू में रखा जाता है। और दोनों में ही, सही समय पर सही क़दम उठा लिया जाए तो सिरोसिस (cirrhosis) और लिवर कैंसर से बचा जा सकता है। यह लेख उसी घबराहट के जवाब में है — आसान हिंदी में, बिना डराए।
हेपेटाइटिस बी और सी में बुनियादी अंतर क्या है?
“हेपेटाइटिस” का सीधा मतलब है लिवर की सूजन। हेपेटाइटिस बी और सी उन वायरसों के नाम हैं जो लिवर की कोशिकाओं में घर बना लेते हैं और सालों तक चुपचाप सूजन पैदा करते रहते हैं। बार-बार की सूजन से लिवर में निशान (फाइब्रोसिस) बनते हैं, निशान बढ़कर सिरोसिस बनता है, और सिरोसिस वाले लिवर में कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है। यहाँ तक दोनों एक जैसे हैं।
फ़र्क़ वायरस की बनावट और रास्ते में है। हेपेटाइटिस बी एक DNA वायरस है। एशिया में यह अक्सर जन्म के समय माँ से या बचपन में लगता है, और छोटी उम्र में लगा वायरस शरीर बाहर नहीं निकाल पाता — वह लिवर की कोशिकाओं के अंदर स्थायी ठिकाना बना लेता है। इसीलिए इसे गोलियों से दबाया जा सकता है, पर जड़ से निकालना मुश्किल है। हेपेटाइटिस सी एक RNA वायरस है, लगभग हमेशा बड़ी उम्र में ख़ून से लगता है, और उसका ऐसा कोई स्थायी ठिकाना नहीं होता — इसलिए आधुनिक दवाएँ उसे पूरी तरह साफ़ कर देती हैं।
दुनिया की तस्वीर: 2022 के एक वैश्विक अनुमान के मुताबिक़ क़रीब 25.75 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं, और उनमें से सिर्फ़ 3.6 करोड़ को अपनी बीमारी का पता है। बाक़ी को तब पता चलता है जब कोई रूटीन टेस्ट, रक्तदान या गर्भावस्था की जाँच इसे पकड़ लेती है। यह बीमारी का दोष नहीं, बीमारी की चुप्पी है।
हेपेटाइटिस बी कैसे फैलता है — और कैसे नहीं?
हेपेटाइटिस बी तीन रास्तों से फैलता है: ख़ून से, यौन संबंध से, और जन्म के समय माँ से बच्चे में। ख़ून से फैलने के मतलब हैं — दोबारा इस्तेमाल की गई सुई या सिरिंज, बिना जाँच का ख़ून चढ़ना (अब ब्लड बैंक हर यूनिट की जाँच करते हैं), एक ही रेज़र, ब्लेड या टूथब्रश, और गंदी सुई से टैटू या कान-नाक छिदवाना। एशिया में सबसे बड़ा रास्ता आज भी माँ से बच्चे में जाना है — इसीलिए कई मरीज़ों को बचपन से यह वायरस है और कभी पता नहीं चला।
अब वह बात जो परिवारों को सबसे ज़्यादा सुननी चाहिए। हेपेटाइटिस बी नहीं फैलता — साथ बैठकर खाना खाने से, एक ही थाली या गिलास से, खाना बनाने से, गले मिलने या हाथ मिलाने से, एक ही शौचालय से, एक ही दफ़्तर या कारख़ाने में काम करने से, खाँसने-छींकने से, या मच्छर के काटने से। बच्चे उसकी गोद में बैठ सकते हैं। पति या पत्नी साथ रह सकते हैं — बस टीका लगवा लें।
मैं यह ज़ोर देकर इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि इस बीमारी से ज़्यादा नुक़सान इसके डर ने किया है। मैंने मरीज़ों को नौकरी से निकाले जाते, रिश्ते टूटते और घर में अलग बर्तन में खाना दिए जाते देखा है — सब बेवजह। जिस घर में एक व्यक्ति को हेपेटाइटिस बी है, वहाँ समझदारी का क़दम है बाक़ी सबकी जाँच और टीका, अलग थाली नहीं।
हेपेटाइटिस सी कैसे फैलता है?
हेपेटाइटिस सी का रास्ता लगभग सिर्फ़ ख़ून है। मेरे भारतीय मरीज़ों में आम कहानियाँ ये हैं: बरसों पहले किसी छोटे क्लिनिक में लगे इंजेक्शन जहाँ सुई दोबारा इस्तेमाल होती थी; 1990 के दशक या उससे पहले चढ़ा ख़ून, जब ब्लड बैंक इसकी जाँच नहीं करते थे; लंबे समय तक डायलिसिस; सड़क किनारे बना टैटू; नशे के लिए साझा सुई; या किसी बड़े ऑपरेशन के दौरान का संपर्क। कई मरीज़ों को ऐसी कोई घटना याद ही नहीं होती — और याद न होना शक की वजह नहीं है।
यौन संबंध से हेपेटाइटिस सी फैल तो सकता है, पर हेपेटाइटिस बी की तुलना में बहुत कम; माँ से बच्चे में जाने का ख़तरा भी छोटा है। खाना, बर्तन, गले लगना या साथ रहना — इनसे यह भी नहीं फैलता। इसलिए हेपेटाइटिस सी निकलने पर पूरे ख़ानदान की नहीं, उन लोगों की जाँच कराएँ जिनका आपके साथ ख़ून का संपर्क संभव रहा हो या जिनका अपना इतिहास डायलिसिस, पुराने ख़ून चढ़ने या टैटू का हो। अंग्रेज़ी में विस्तार से मेरे हेपेटाइटिस सी पेज पर पढ़ें।
रिपोर्ट में HBsAg या anti-HCV पॉज़िटिव आया है — इसका मतलब क्या है?
हेपेटाइटिस बी: पहली जाँच HBsAg है — वायरस के ऊपरी खोल का प्रोटीन। HBsAg पॉज़िटिव का मतलब है वायरस शरीर में मौजूद है; 6 महीने से ज़्यादा पॉज़िटिव रहे तो संक्रमण क्रॉनिक माना जाता है। इसके बाद डॉक्टर HBV DNA (वायरल लोड — ख़ून में वायरस कितना है), HBeAg, लिवर के एंज़ाइम (ALT, AST), अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन (FibroScan) करवाते हैं। इन्हीं से तय होता है कि वायरस कितना सक्रिय है, लिवर को कितना नुक़सान हुआ है, और दवा अभी शुरू करनी है या सिर्फ़ निगरानी रखनी है।
हेपेटाइटिस सी: पहली जाँच anti-HCV है, और यहीं सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी होती है। Anti-HCV एक एंटीबॉडी है — यह बताती है कि शरीर का वायरस से कभी सामना हुआ था, यह नहीं बताती कि वायरस अभी है या नहीं। 31 अध्ययनों के 675 लोगों की एक व्यवस्थित समीक्षा में क़रीब 26% लोगों ने बिना दवा के वायरस ख़ुद ही साफ़ कर दिया था; उनमें एंटीबॉडी ज़िंदगी भर पॉज़िटिव रहती है, वायरस नहीं होता। इसलिए अगला क़दम HCV RNA टेस्ट है। RNA पॉज़िटिव — वायरस सक्रिय है, इलाज चाहिए। RNA नेगेटिव — संक्रमण पुराना है और अपने आप ठीक हो चुका।
दोनों में लिवर के एंज़ाइम सामान्य होना “लिवर ठीक है” का सबूत नहीं है — वायरल हेपेटाइटिस में ALT सामान्य रहते हुए भी फाइब्रोसिस बढ़ सकता है (LFT की रिपोर्ट कैसे पढ़ें)। इसलिए पॉज़िटिव रिपोर्ट पर “सब नॉर्मल है” सुनकर रुक न जाएँ; एक बार लिवर विशेषज्ञ से पूरी जाँच कराएँ।
हेपेटाइटिस सी का इलाज: 8–12 हफ़्ते की गोलियाँ और वायरस साफ़
यह आज के लिवर विज्ञान की सबसे अच्छी ख़बर है: हेपेटाइटिस सी ठीक हो जाता है। पूरी तरह।
दस-बारह साल पहले तक इलाज इंटरफ़ेरॉन के इंजेक्शन थे — महीनों तक, बुख़ार और थकान के साथ, और आधे से भी कम में कामयाबी। अब इलाज है रोज़ एक गोली, 8 से 12 हफ़्ते, लगभग बिना तकलीफ़ के — इन्हें DAA (direct-acting antivirals) कहते हैं। 2015 में New England Journal of Medicine में छपे ASTRAL-1 ट्रायल में 624 मरीज़ों को 12 हफ़्ते सोफ़ोसबुविर-वेल्पाटासविर दी गई; 19% को पहले से सिरोसिस था और 32% का पुराना इलाज नाकाम हो चुका था। फिर भी 99% में वायरस साफ़ हुआ, और गंभीर दुष्प्रभाव सिर्फ़ 2% में। यूरोपीय लिवर संस्था EASL की 2020 की सिफ़ारिशें ऐसी ही दवाओं को हर जीनोटाइप के लिए मानक इलाज बताती हैं। इलाज ख़त्म होने के 12 हफ़्ते बाद HCV RNA न मिले तो इसे SVR कहते हैं — और इसे ही ठीक होना माना जाता है।
दो बातें ईमानदारी से। पहली, दवा वायरस हटाती है, पर पहले से बना सिरोसिस रातोंरात नहीं जाता — ऐसे मरीज़ों को वायरस साफ़ होने के बाद भी हर छह महीने लिवर कैंसर की निगरानी चाहिए। दूसरी, दवा कौन-सी और कितने हफ़्ते, यह जीनोटाइप, सिरोसिस और पहले के इलाज पर निर्भर करता है — यह फ़ैसला डॉक्टर का है; कोई दवा ख़ुद से शुरू न करें। भारत में सरकारी कार्यक्रम के तहत कई सरकारी अस्पतालों में ये दवाएँ उपलब्ध हैं — अपने नज़दीकी सरकारी अस्पताल या लिवर विशेषज्ञ से पूछें।
हेपेटाइटिस बी का इलाज: काबू में, लेकिन लंबा
पहली बात — HBsAg पॉज़िटिव हर व्यक्ति को तुरंत दवा की ज़रूरत नहीं होती। कई लोगों में वायरस शांत बैठा रहता है और लिवर को नुक़सान नहीं पहुँचा रहा होता; उन्हें दवा नहीं, निगरानी चाहिए। EASL की 2017 की गाइडलाइन के मुताबिक़ दवा आम तौर पर तब शुरू होती है जब HBV DNA 2,000 IU/ml से ज़्यादा हो और साथ में लिवर के एंज़ाइम बढ़े हों या लिवर में नुक़सान के सबूत हों। और जिसे सिरोसिस है और ख़ून में वायरस मिल रहा है, उसे हर हाल में दवा चाहिए।
दूसरी बात — दवा बहुत अच्छी तरह काम करती है। एंटेकाविर या टेनोफ़ोविर जैसी एक गोली रोज़ वायरस को ख़ून में नापने लायक़ भी नहीं छोड़ती, सूजन शांत हो जाती है, और लंबे समय में सिरोसिस और लिवर कैंसर का ख़तरा काफ़ी घट जाता है। मेरे पास ऐसे मरीज़ हैं जो पंद्रह साल से एक गोली ले रहे हैं और पूरी तरह सामान्य ज़िंदगी जी रहे हैं।
तीसरी बात — यह गोली वायरस को दबाती है, मिटाती नहीं। 2019 में Gastroenterology में छपी 42,588 मरीज़ों की समीक्षा के अनुसार HBsAg हर साल सिर्फ़ क़रीब 1% लोगों में ख़त्म होता है, दस साल में लगभग 8% में। इसीलिए दवा ज़्यादातर लोगों के लिए लंबी, अक्सर ज़िंदगी भर की होती है। और सबसे ज़रूरी चेतावनी: यह दवा कभी अपने आप बंद न करें — अचानक बंद करने से वायरस तेज़ी से लौट सकता है और लिवर में गंभीर, कभी-कभी जानलेवा सूजन आ सकती है। सिरोसिस बन चुका हो तो दवा के साथ हर छह महीने कैंसर की निगरानी चलती रहती है; आगे क्या होता है, यह लिवर सिरोसिस पेज पर है।
| विशेषता | हेपेटाइटिस बी | हेपेटाइटिस सी |
|---|---|---|
| वायरस का प्रकार | DNA वायरस | RNA वायरस |
| कैसे फैलता है | ख़ून, यौन संबंध, जन्म के समय माँ से बच्चे में | मुख्यतः ख़ून — दोबारा इस्तेमाल सुई, पुराना ख़ून चढ़ना, डायलिसिस, टैटू |
| कैसे नहीं फैलता | खाना, बर्तन, गले मिलना, साथ काम करना | खाना, बर्तन, गले मिलना, साथ काम करना |
| पहली जाँच | HBsAg; फिर HBV DNA, HBeAg | Anti-HCV; फिर HCV RNA (सक्रिय संक्रमण की पुष्टि) |
| शरीर ख़ुद साफ़ कर सकता है? | बड़ी उम्र में लगे संक्रमण में अक्सर; बचपन में लगे में कम | क़रीब 26% में; बाक़ी में क्रॉनिक |
| इलाज | रोज़ एक गोली, लंबे समय तक — वायरस दबता है | 8–12 हफ़्ते की गोलियाँ — वायरस साफ़ (99% तक) |
| पूरी तरह ठीक? | कम ही — HBsAg साल में क़रीब 1% में जाता है | हाँ, ज़्यादातर मरीज़ों में |
| टीका | है — सुरक्षित और असरदार | नहीं है |
| सिरोसिस और लिवर कैंसर का ख़तरा | हाँ, बिना इलाज के | हाँ, बिना इलाज के |
परिवार की जाँच, टीका और गर्भावस्था
घर में किसी को हेपेटाइटिस बी निकले तो तीन काम एक साथ: सभी सदस्यों और जीवनसाथी की जाँच (HBsAg के साथ anti-HBs और anti-HBc — किसे संक्रमण है, कौन पहले से सुरक्षित है, किसे टीका चाहिए); जो नेगेटिव हैं उन्हें टीके का पूरा कोर्स; और जो पॉज़िटिव निकले उनकी वही पूरी जाँच जो ऊपर बताई।
हेपेटाइटिस बी का टीका दशकों से इस्तेमाल में है, सुरक्षित है, और भारत के नियमित बाल-टीकाकरण में शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का 2017 का पोज़िशन पेपर जन्म के समय की पहली खुराक को इस बीमारी से बचाव का सबसे असरदार क़दम बताता है। 2022 के वैश्विक अनुमान के अनुसार 85% शिशुओं को तीनों खुराकें मिल रही हैं, पर सिर्फ़ 46% को समय पर जन्म की खुराक — यहीं सबसे ज़्यादा सुधार की गुंजाइश है। बड़े भी, जिन्होंने बचपन में टीका नहीं लिया, कोर्स अब ले सकते हैं। हेपेटाइटिस सी का टीका अभी नहीं है; उससे बचाव है सुरक्षित सुई, जाँचा हुआ ख़ून और सावधानी।
गर्भावस्था में सिद्धांत साफ़ है। हर गर्भवती महिला की HBsAg जाँच होनी चाहिए। माँ पॉज़िटिव हो तो नवजात को जन्म के 12 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी का टीका और HBIG (हेपेटाइटिस बी इम्युनोग्लोबुलिन) दिया जाता है, फिर टीके का कोर्स पूरा होता है — इससे बच्चे के बचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। बहुत ज़्यादा वायरल लोड वाली माँ को गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में एंटीवायरल दवा भी दी जा सकती है; यह फ़ैसला लिवर विशेषज्ञ और स्त्री-रोग विशेषज्ञ मिलकर लेते हैं। हेपेटाइटिस बी पॉज़िटिव माँ सामान्य प्रसव और, टीका लगे बच्चे को, स्तनपान करा सकती है। हेपेटाइटिस सी में सबसे अच्छी योजना है गर्भधारण से पहले ही 8–12 हफ़्ते का इलाज पूरा कर लेना — वायरस साफ़, तो बच्चे तक पहुँचने का सवाल ही नहीं।
आख़िर में वह बात जो मैं उस 38 साल के व्यक्ति से कहता: आपका ऑपरेशन टला है, रद्द नहीं हुआ। लिवर की पूरी जाँच कराइए, दवा की ज़रूरत हो तो शुरू कीजिए, घर में सबकी जाँच और टीका करवाइए — और फिर अपनी ज़िंदगी वैसे ही जिएँ जैसे पहले जी रहे थे। हेपेटाइटिस बी या सी की रिपोर्ट एक काम की सूची है, कोई सज़ा नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हेपेटाइटिस बी खाना या बर्तन साझा करने से फैलता है?
नहीं। हेपेटाइटिस बी ख़ून, यौन संबंध और जन्म के समय माँ से बच्चे में फैलता है। साथ खाना खाने, एक ही बर्तन या गिलास इस्तेमाल करने, गले मिलने, हाथ मिलाने या साथ काम करने से यह नहीं फैलता। घर के सदस्यों को अलग बर्तन की नहीं, जाँच और टीके की ज़रूरत है।
क्या हेपेटाइटिस सी पूरी तरह ठीक हो सकता है?
हाँ। 8–12 हफ़्ते की रोज़ एक गोली वाली दवाओं से ज़्यादातर मरीज़ों में वायरस पूरी तरह साफ़ हो जाता है; 12 हफ़्ते के एक बड़े ट्रायल में 99% मरीज़ ठीक हुए। इलाज ख़त्म होने के 12 हफ़्ते बाद HCV RNA नेगेटिव आए तो इसे ठीक होना माना जाता है। अगर पहले से सिरोसिस है, तो ठीक होने के बाद भी लिवर कैंसर की नियमित निगरानी ज़रूरी है।
क्या हेपेटाइटिस बी की दवा ज़िंदगी भर लेनी पड़ती है?
ज़्यादातर लोगों के लिए, हाँ — लंबे समय तक, अक्सर ज़िंदगी भर। दवा वायरस को दबाती है, मिटाती नहीं; HBsAg हर साल सिर्फ़ क़रीब 1% लोगों में ख़त्म होता है। दवा कभी अपने आप बंद न करें, क्योंकि अचानक बंद करने से वायरस लौटकर लिवर में गंभीर सूजन कर सकता है। बंद करने का फ़ैसला सिर्फ़ लिवर विशेषज्ञ जाँच के बाद करता है।
Anti-HCV पॉज़िटिव है लेकिन HCV RNA नेगेटिव — क्या मुझे इलाज चाहिए?
नहीं। Anti-HCV एंटीबॉडी बताती है कि वायरस से कभी सामना हुआ था; क़रीब 26% लोग वायरस को ख़ुद ही साफ़ कर देते हैं और उनमें एंटीबॉडी ज़िंदगी भर पॉज़िटिव रहती है। HCV RNA नेगेटिव का मतलब है वायरस अभी शरीर में नहीं है, इसलिए इलाज की ज़रूरत नहीं। रिपोर्ट एक बार लिवर विशेषज्ञ को ज़रूर दिखाएँ।
क्या हेपेटाइटिस बी या सी वाला व्यक्ति शादी कर सकता है और बच्चे पैदा कर सकता है?
हाँ, दोनों में। हेपेटाइटिस बी में जीवनसाथी की जाँच और टीका ज़रूरी है, और गर्भावस्था में नवजात को जन्म के 12 घंटे के भीतर टीका और HBIG दिया जाता है। हेपेटाइटिस सी में सबसे अच्छा है गर्भधारण से पहले 8–12 हफ़्ते का इलाज पूरा करके वायरस साफ़ कर लेना। दोनों ही स्थितियों में सामान्य पारिवारिक जीवन संभव है।
मुंबई के ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल में डॉ. चेतन कलाल से परामर्श के लिए +91 83294 76669 पर कॉल करें या इस वेबसाइट पर अपॉइंटमेंट फ़ॉर्म भरें। दूसरे शहरों और विदेश में रहने वाले मरीज़ टेली-कंसल्टेशन का अनुरोध कर सकते हैं।
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