लिवर फेल होना (ACLF) क्या है? कारण, लक्षण और इलाज — डॉ. चेतन कलाल, मुंबई

लिवर फेल होना (ACLF) क्या है? कारण, लक्षण और इलाज — डॉ. चेतन कलाल, मुंबई

Acute-on-chronic liver failure (ACLF) is a medical emergency in which a patient with existing but often undiagnosed chronic liver disease develops sudden jaundice, bleeding tendency, and organ failure within days to weeks. It carries a high short-term risk and needs specialist ICU-level care, not routine outpatient management. Dr Chetan Kalal, DM Hepatology, is a member of the APASL AARC (Asian Pacific Association for the Study of the Liver — ACLF Research Consortium) working group and has co-authored the international consensus definitions used to diagnose and grade this condition. This Hindi-language guide explains what “लिवर फेल होना” actually means, why it happens, and when to seek help.

बहुत से मरीज और परिवार जब पहली बार सुनते हैं कि “लिवर फेल हो गया है”, तो घबरा जाते हैं — और यह घबराहट गलत भी नहीं है। पर हर बार लिवर फेल होने का मतलब एक जैसा नहीं होता। डॉक्टरी भाषा में जिस स्थिति की बात हम यहां कर रहे हैं, उसे Acute-on-Chronic Liver Failure (ACLF) कहा जाता है — यानी ऐसा व्यक्ति जिसे पहले से लिवर की कोई पुरानी बीमारी (जैसे सिरोसिस, फैटी लिवर या हेपेटाइटिस) थी, भले ही उसका पता चला हो या न चला हो, उसमें अचानक कुछ दिनों से कुछ हफ्तों के भीतर पीलिया, खून बहने की प्रवृत्ति और एक या एक से अधिक अंगों का काम करना बंद होने लगता है। यह सामान्य सिरोसिस से अलग है — यहां बीमारी अचानक और तेज़ी से बिगड़ती है, और समय पर सही इलाज न मिले तो जान को खतरा बढ़ जाता है। डॉ. चेतन कलाल — मुंबई के ग्लेनईगल्स अस्पताल में हेपेटोलॉजिस्ट और लिवर ट्रांसप्लांट फिजिशियन — APASL के AARC (ACLF Research Consortium) वर्किंग ग्रुप के सदस्य हैं और इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय सहमति-पत्रों (consensus guidelines) के सह-लेखक रह चुके हैं। यह जानकारी शिक्षा के उद्देश्य से है — किसी भी लक्षण के लिए कृपया सीधे विशेषज्ञ से मिलें।

ACLF की परिभाषा — यह सामान्य सिरोसिस से कैसे अलग है

APASL (एशिया पैसिफिक एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ द लिवर) की सहमति के अनुसार, ACLF तब कहलाता है जब पहले से मौजूद क्रॉनिक लिवर बीमारी वाले मरीज में कोई नया आघात (acute insult) — जैसे शराब का सेवन दोबारा शुरू होना, वायरल हेपेटाइटिस का भड़कना, या कोई दवा — लिवर को अचानक और तेज़ी से नुकसान पहुंचाता है। इसके परिणामस्वरूप 4 हफ्तों के भीतर पीलिया और कोऐगुलोपैथी (खून का ठीक से न जमना) के साथ-साथ जलोदर (पेट में पानी भरना) या हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी (भ्रम, नींद जैसी स्थिति) विकसित हो सकती है। डॉ. कलाल और APASL AARC समूह द्वारा प्रकाशित कार्य — जिसमें 2025 का “Kyoto Consensus” शामिल है — इसी परिभाषा को एशियाई मरीजों के अनुरूप और स्पष्ट करने का काम करते हैं। गंभीरता मापने के लिए AARC स्कोर का इस्तेमाल होता है, जो बिलीरुबिन, INR, क्रिएटिनिन, लैक्टेट और एन्सेफैलोपैथी के ग्रेड को मिलाकर तय करता है कि मरीज को ग्रेड I, II या III ACLF है — और इलाज की दिशा इसी ग्रेडिंग पर निर्भर करती है।

ACLF के मुख्य कारण

भारतीय और एशियाई मरीजों में ACLF को ट्रिगर करने वाले सबसे आम कारणों में शराब का दोबारा या अधिक सेवन, हेपेटाइटिस बी का अचानक भड़कना (reactivation), हेपेटाइटिस A या E का ऊपर से हो जाना (superimposed infection), और दवा या हर्बल/आयुर्वेदिक उत्पादों से लिवर को होने वाली चोट (drug-induced liver injury) शामिल हैं। डॉ. कलाल के सह-लेखन में प्रकाशित शोध ने यह भी दिखाया है कि कुछ सामान्य हर्बल उत्पाद — जैसे गिलोय (Tinospora cordifolia) — गलत तरीके से या बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक लिए जाने पर गंभीर लिवर क्षति और ACLF तक का कारण बन सकते हैं। सेप्सिस (शरीर में गंभीर संक्रमण) भी एक बड़ा ट्रिगर है। ध्यान देने वाली बात यह है कि बहुत बार मरीज को यह पता ही नहीं होता कि उसे पहले से लिवर की कोई बीमारी थी — इसलिए यह स्थिति “अचानक” और डरावनी लगती है, जबकि असल में लिवर पहले से ही कमजोर हो चुका होता है।

पहचानने योग्य लक्षण और चेतावनी के संकेत

आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, पेशाब का गहरा रंग, पेट का अचानक फूलना (जलोदर), बिना किसी चोट के शरीर पर नील पड़ना या मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक थकान, और भ्रम या असामान्य नींद (हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी की शुरुआत) — ये सभी संकेत हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। जिन मरीजों को पहले से सिरोसिस, फैटी लिवर या हेपेटाइटिस बी/सी का पता है, उनमें ये लक्षण विशेष रूप से गंभीरता से लेने चाहिए। डॉ. कलाल के सह-लेखन में प्रकाशित एक अध्ययन (2025) ने यह भी दर्शाया है कि जिन मरीजों को डायबिटीज़ भी है और उन्हें शराब-संबंधी ACLF होता है, उनमें मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक पाया गया — इसलिए डायबिटीज़ पर नियंत्रण रखना सिरोसिस के मरीजों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि परिवार में किसी को ये लक्षण एक साथ या तेज़ी से बढ़ते दिखें, तो घर पर इंतज़ार करने के बजाय तुरंत किसी हेपेटोलॉजिस्ट या लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर से संपर्क करना चाहिए।

इलाज का तरीका — ICU देखभाल से लिवर ट्रांसप्लांट तक

ACLF का इलाज हमेशा अस्पताल में, अक्सर ICU स्तर की निगरानी में होता है, क्योंकि स्थिति घंटों में बदल सकती है। पहला कदम है ट्रिगर करने वाले कारण का पता लगाना और उसका इलाज करना — चाहे वह संक्रमण हो, शराब हो या कोई दवा। साथ ही, कोऐगुलोपैथी, किडनी के कार्य में गिरावट (एक्यूट किडनी इंजरी), और एन्सेफैलोपैथी जैसी जटिलताओं को सम्भालना ज़रूरी होता है। पोषण (न्यूट्रिशन) की भूमिका को अक्सर कम आंका जाता है — डॉ. कलाल की अपनी प्रकाशित रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल में यह दिखाया गया है कि शराब-संबंधी सिरोसिस के मरीजों में सही और आक्रामक पोषण चिकित्सा जीवित रहने की संभावना को बेहतर करने में मदद कर सकती है। चुनिंदा मरीजों में, विशेषज्ञ केंद्रों पर प्लाज़्मा एक्सचेंज जैसी उपचार पद्धतियों पर भी विचार किया जाता है, जिसका अध्ययन डॉ. कलाल के शोध समूह ने AARC नेटवर्क के भीतर किया है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझनी चाहिए — जिन मरीजों में दवा से लिवर ठीक होने के संकेत नहीं दिखते, उनके लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र निर्णायक इलाज रह जाता है, और इसीलिए शुरुआत से ही ट्रांसप्लांट सेंटर से आकलन करवाना जीवन बचाने में निर्णायक हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. ACLF और सामान्य सिरोसिस में क्या अंतर है?
सिरोसिस धीरे-धीरे, वर्षों में बढ़ने वाली बीमारी है। ACLF में, पहले से मौजूद सिरोसिस या लिवर बीमारी पर कोई नया आघात (जैसे संक्रमण, शराब, या दवा) अचानक और तेज़ी से लिवर तथा अन्य अंगों को फेल करने लगता है — यह दिनों से हफ्तों के भीतर होता है, इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।

2. क्या ACLF ठीक हो सकता है?
कुछ मरीजों में सही और समय पर इलाज से लिवर काफी हद तक ठीक हो सकता है, विशेषकर यदि ट्रिगर करने वाला कारण पहचान कर उसका इलाज कर दिया जाए। लेकिन जिन मरीजों में लिवर ठीक होने के संकेत नहीं मिलते, उनके लिए लिवर ट्रांसप्लांट पर विचार करना ज़रूरी हो जाता है। हर मरीज का इलाज उसकी ग्रेडिंग (AARC स्कोर) और अंग-कार्यों की स्थिति पर निर्भर करता है।

3. ACLF किन लोगों में होने का खतरा ज़्यादा है?
जिन्हें पहले से सिरोसिस, फैटी लिवर (MASLD), हेपेटाइटिस बी या सी है, वे अधिक जोखिम में हैं — खासकर यदि वे शराब का सेवन जारी रखते हैं, कोई नई दवा या हर्बल उत्पाद बिना सलाह के लेते हैं, या डायबिटीज़ जैसी सहवर्ती बीमारी भी है।

4. क्या ACLF में हमेशा लिवर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत पड़ती है?
नहीं। कई मरीज सही मेडिकल प्रबंधन से ठीक हो जाते हैं। ट्रांसप्लांट का विचार तब किया जाता है जब लिवर की स्थिति में सुधार के संकेत नहीं मिलते या अंग-विफलता की ग्रेडिंग गंभीर होती है — यह निर्णय हेपेटोलॉजिस्ट और ट्रांसप्लांट टीम मिलकर लेते हैं।

5. ACLF से बचाव के लिए क्या किया जा सकता है?
यदि आपको पहले से सिरोसिस, फैटी लिवर या हेपेटाइटिस है, तो शराब पूरी तरह बंद करें, बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा या हर्बल उत्पाद न लें, हेपेटाइटिस बी/सी की नियमित जांच करवाते रहें, और डायबिटीज़ व वज़न को नियंत्रण में रखें। किसी भी नए लक्षण पर तुरंत हेपेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

6. मुंबई में ACLF का इलाज कहां और किससे करवाएं?
ACLF के लिए ऐसे केंद्र की ज़रूरत होती है जहां हेपेटोलॉजी ICU, लिवर ट्रांसप्लांट टीम और मल्टी-डिसिप्लिनरी सपोर्ट एक साथ उपलब्ध हों। डॉ. चेतन कलाल, ग्लेनईगल्स हॉस्पिटल, मुंबई में इस स्तर की देखभाल प्रदान करते हैं।

ACLF के बारे में अधिक विस्तृत तकनीकी जानकारी के लिए हमारा अंग्रेज़ी लेख Best ACLF Specialist in Mumbai and India देखें। जिन मरीजों को पहले से सिरोसिस है, उनके लिए हमारा लिवर सिरोसिस केयर पेज उपयोगी होगा। यदि आपके यहां पहले से किसी डॉक्टर द्वारा इलाज चल रहा है और आप एक विशेषज्ञ दूसरी राय (second opinion) चाहते हैं, तो हमारा सेकंड ओपिनियन पेज देखें। यदि स्थिति गंभीर हो और लिवर ट्रांसप्लांट पर विचार करना पड़े, तो हमारा लिवर ट्रांसप्लांट गाइड पढ़ें, और हमारी सभी हेपेटोलॉजी सेवाओं की जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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यदि आपको या आपके परिवार में किसी को पीलिया, अचानक पेट फूलना, भ्रम, या असामान्य खून बहने जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो देर न करें — यह एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है।

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